बीकानेर, राजस्थान।समाज में दहेज मुक्त विवाह को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। धन्नासर निवासी सोमदत्त स्वामी ने दीपक की शादी के दौरान न सिर्फ दहेज लेने से इंकार किया, बल्कि वर पक्ष के लिए किसी भी प्रकार के गिफ्ट, कपड़े, शगुन या अन्य पारंपरिक उपहार लेने से भी साफ मना कर दिया। उनके इस कदम को पूरे इलाके में अत्यधिक सराहना मिल रही है।
शादी के दौरान जब कन्या पक्ष ने परंपरा निभाने के चलते उपहार और शगुन देने की इच्छा जताई, तो सोमदत्त स्वामी ने बड़े सहज लेकिन दृढ़ शब्दों में कहा कि “शादी परंपरा और संस्कारों का उत्सव है, इसे आर्थिक भार का कारण नहीं बनना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि सामाजिक सुधार तभी संभव है जब लोग स्वयं आगे बढ़कर परिवर्तन की शुरुआत करें।
सोमदत्त स्वामी की चर्चा सिर्फ दहेज विरोधी रुख के कारण नहीं, बल्कि इसलिए भी हो रही है कि इसी वर्ष उनका चयन राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) में हुआ है। एक युवा अधिकारी द्वारा ऐसा सामाजिक संदेश देना युवाओं के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि उच्च पद पर पहुंचने के बाद भी उनका सादा, संवेदनशील और सामाजिक सोच वाला यह कदम उनकी छवि को और भी मजबूत बनाता है।
शादी समारोह में उपस्थित ग्रामीणों, रिश्तेदारों और समाज के विभिन्न वर्गों ने सोमदत्त स्वामी को “दहेज प्रथा के खिलाफ नई पीढ़ी का चेहरा” बताते हुए उनकी खुलकर प्रशंसा की। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इसे समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत बताया।
क्षेत्र में यह घटना अब चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है। लोगों का मानना है कि यदि शिक्षित और जागरूक परिवार इस तरह पहल करते रहेंगे तो दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त करना कठिन नहीं होगा।
दीपक का विवाह अपने आप में एक अनूठा अवसर बन गया—सिर्फ दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि समाज को दहेज मुक्त भारत की दिशा में मजबूत संदेश देने वाला एक प्रेरणादायक कदम।
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