बीकानेर, 17 अक्टूबर।
राजस्थान के पूर्व मंत्री एवं बीकानेर पश्चिम के पूर्व विधायक डॉ. बी.डी. कल्ला ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर बीकानेर की गोचर भूमि को म्यूटेशन के माध्यम से आवासीय भूमि में दर्ज करने की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
डॉ. कल्ला ने यह पत्र माननीय मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री सहित मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार को प्रेषित किया है। उन्होंने कहा कि बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा तैयार किए गए मास्टर प्लान 2043 में करीब 40,000 बीघा गोचर भूमि को आवासीय व अन्य उपयोग के लिए प्रस्तावित किया गया है, जो न केवल विधि-विरुद्ध है बल्कि जनभावनाओं के भी विपरीत है।
उन्होंने बताया कि सरे नथानियां, गंगाशहर-भीनासर, सुजानदेसर और उदयरामसर क्षेत्र की यह भूमि रियासत काल में दानदाताओं द्वारा गायों के चरागाह हेतु खरीदी और गोचर के रूप में दान दी गई थी। तत्कालीन महाराजा ने इस भूमि को गोचर के रूप में स्थायी रूप से दर्ज रखने का आदेश जारी किया था, जिसमें लिखा गया था कि “जब तक चांद-तारे रहेंगे, यह भूमि गोचर के रूप में दर्ज रहेगी।”
डॉ. कल्ला ने कहा कि बीकानेर विकास प्राधिकरण द्वारा इस भूमि को “रकबा राज” में दर्ज कर आवासीय उपयोग हेतु म्यूटेशन करवाना कानूनी रूप से गलत है। उन्होंने बताया कि हजारों लोगों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं, परंतु अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि बीकानेर, जिसे “छोटी काशी” कहा जाता है, की यह भूमि न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, पशु-पक्षियों की चराई और जैव विविधता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डॉ. कल्ला ने बताया कि रियासत काल में श्री भागीरथ जी राठी, श्री भैरूदान जी चौपड़ा और श्री नत्थूलाल जी नथानियां जैसे महान दानदाताओं ने इस भूमि को अपने निजी संसाधनों से खरीदकर गोचर हेतु दान दिया था। ऐसे में इसे सरकारी भूमि में बदलना, उन दानदाताओं की भावनाओं और जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गोचर भूमि को म्यूटेशन द्वारा आवासीय भूमि में दर्ज करने की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त नहीं किया गया, तो जन आंदोलन चलाया जाएगा और विधिसम्मत कार्यवाही की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।























