बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा गोचर व ओरण भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ अब जन और संत समाज एकजुट हो गया है। ‘गौचर ओरण बचाओ संघर्ष समिति’ ने इस मुद्दे पर सरकार को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि अधिग्रहण आदेश वापस नहीं लिए गए तो संतों के सानिध्य में “गोचर बचाओ महाआंदोलन” चलाया जाएगा। समिति ने कहा कि यह अब केवल भूमि का नहीं, बल्कि आस्था, पर्यावरण और संस्कृति की रक्षा का आंदोलन है।
समिति के संयोजक शिवकुमार गहलोत ने बताया कि अब तक 37 हजार से अधिक आपत्तियां इस अधिग्रहण के खिलाफ दर्ज करवाई जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि “प्रशासन अब भी जनता की भावनाओं को नहीं समझ रहा है। यदि जल्द निर्णय नहीं हुआ तो संगठन आर-पार की लड़ाई लड़ेगा-चाहे रेल रोको, बीकानेर बंद या आमरण अनशन ही क्यों न करना पड़े।”
गहलोत ने यह भी कहा कि बीकानेर के छह विधायकों ने आंदोलन को समर्थन दिया है, लेकिन “एक राज्य मंत्री और एक विधायक अब भी मौन हैं। यदि उन्होंने गोचर भूमि बचाने के लिए पहल नहीं की तो भविष्य में जनता उनके कार्यक्रमों का विरोध करेगी।”
संत समाज का मिला मजबूत समर्थन
महंत क्षमाराम महाराज ने कहा, “बीकानेर की गोचर भूमि केवल जमीन नहीं, बल्कि गौवंश सहित समस्त प्राणी मात्र के जीवन का आधार है। यदि सरकार इसकी ‘किस्म’ बदलने का प्रयास करती है, तो यह प्राणी मात्र के हितों पर कुठाराघात होगा। अंधे विकास की दौड़ नाश को आमंत्रित कर रही है।”
संत किशोरीदास महाराज ने कहा, “गोचर हमारी आस्था, संस्कृति, धर्म और पर्यावरण का आधार है। बीकानेर की जनता ने अपने पैसों से यह भूमि छुड़वाई है; यह सरकारी नहीं, जन की भूमि है। यदि आवश्यकता पड़ी तो हजारों संत बीकानेर में धरना और महापड़ाव करेंगे।”
योगी विलास नाथ महाराज ने कहा कि “यह अब एक जनआंदोलन बन चुका है। यदि सरकार ने समय रहते अधिग्रहण आदेश नहीं बदले तो संत समाज भी विरोध के लिए सड़क पर उतरेगा।”
“गौ, गोचर, गंगा, स्वामी विमर्शानंद गिरि ने कहा गीता, गायत्री और गोरी हमारी संस्कृति के प्रतीक हैं। यदि इन्हें बचाना है, तो हर कीमत पर गोभी की रक्षा करनी होगी। बीकानेर नथानियान, गंगाशहर, भीनासर, उदयरामसर सहित 188 गांवों की गोचर भूमि की हानि नहीं होने दी जाएगी।”
नेताओं का भी समर्थन
गौचर आंदोलन के संयोजक शिव कुमार गहलोत ने बताया कि इस आंदोलन को पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी, कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी, बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास सहित छः विधायकों और कई नेताओं ने भी समर्थन दिया है। सभी नेताओं ने पहले ही मुख्यमंत्री को अपनी आपत्तियां दर्ज करवा दी हैं।
ये रहे मौजूद
बैठक में बंसीलाल तंवर, कैलाश सोलंकी, सूरजमाल सिंह नीमराना, बांदा, नरसिंहदास मिमानी, मनोज सेवग, सूरजप्रकाश राव, योगेश गहलोत, निर्मल शर्मा, उमाशंकर सोलंकी, यशवीर चौधरी, और धर्मेन्द्र सारस्वत सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।























