राजस्थान की तपती धूप और सुनहरे खेतों के बीच, जहाँ ज़मीन से जुड़ा जीवन ही लोगों की पहचान बनता है, वहीं पले-बढ़े राज सिंह शेखावत। किसान परिवार के इस बेटे ने बचपन से ही हल–जोत, मिट्टी–पानी और मौसम की मार के साथ जीना सीखा। खेतों में पिता के साथ घंटों काम करते हुए उनके भीतर मेहनत, संयम और अडिग संकल्प जैसे संस्कार गहराई से बस गए।
लेकिन राज सिर्फ खेतों की सीमाओं में बंधकर नहीं रहना चाहते थे। गाँव के सामान्य से दिनों के बीच ही उनके मन में एक असाधारण सपना पल रहा था—देश की सेवा करने का, अपने परिवार का नाम ऊँचा करने का। यही सपना एक दिन उन्हें अपने छोटे से गाँव से बाहर, एक नए सफ़र की ओर ले गया।
इस सफ़र का पड़ाव बना केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)। यहाँ पहुँचे तो अपने साथ सिर्फ़ गाँव की मिट्टी की महक ही नहीं, बल्कि अनुशासन, परिश्रम और दृढ़ इच्छा शक्ति का वो पूरा खजाना भी लाए थे, जिसने आगे चलकर उन्हें सम्मान, उपलब्धियों और गर्व से भरी एक नई पहचान दी।
42 सप्ताह की कठोर साधना के बाद, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की 47वीं बैच के CT/GD प्रशिक्षुओं की भव्य पासिंग आउट परेड 15 नवम्बर 2025 को ओडिशा के मूंडली स्थित खड़वेल रीजनल ट्रेनिंग सेंटर (KRTC) में आयोजित हुई। दशकों से यह प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थान नई भर्ती हुई पीढ़ियों और सेवारत जवानों को अनुशासन, दक्षता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों में ढालने का महत्वपूर्ण दायित्व निभाता आया है।
इसी पावन दिवस पर, राज सिंह शेखावत के जीवन में मानो एक नया सूरज उगा। 47 सप्ताह की कठिन ट्रेनिंग—जिसमें मन और शरीर, दोनों की कसौटी पर परखा जाता है—उसे राज ने सफलता और शान से पूर्ण कर लिया था । न सिर्फ़ उन्होंने प्रशिक्षण पूरा किया, बल्कि पूरे बैच में प्रथम स्थान पाकर ऑल-राउंड बेस्ट ट्रॉफी भी अपने नाम की। अब वे कॉन्स्टेबल/जीडी राज सिंह शेखावत हैं—विश्व के सबसे बड़े औद्योगिक सुरक्षा बल का हिस्सा, देश के महत्वपूर्ण और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए पूर्णतः तैयार।
गाँव के एक साधारण किसान परिवार का यह बेटा, अब राष्ट्रीय गौरव की पंक्ति में खड़ा था। जब चमचमाती पोषाक में सजे राज ने मुख्य अतिथि डॉ. शिखर सहाय, इंस्पेक्टर जनरल (CISF), NES-II मुख्यालय, कोलकाता से प्रतिष्ठित ट्रॉफी प्राप्त की, तो मंच के सामने बैठे उनके परिजनों की आँखों में गर्व और आनंद के चमकते आंसू किसी शब्द से परे थे। उनकी मुस्कान मानो कह रही थी—“हमारा राज अब देश का राज है।”
परेड का समारोह अपने आप में एक दृश्य उत्सव था—सजी-धजी पलटनें, तालबद्ध कदमों की गूंज, और CISF बैंड की गूंजती देशभक्ति धुनें, जिन्होंने वातावरण में जोश, गर्व और मातृभूमि के प्रति अटूट निष्ठा का भाव भर दिया। यह केवल एक परेड नहीं थी, बल्कि युवा सिपाहियों के लिए उस सफर की शुरुआत थी, जिसमें वे देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाए निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे ।























