बीकानेर। पीबीएम अस्पताल में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास ने पीबीएम प्रशासन पर भ्रष्टाचार के तीन गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रबंधन और संविदा नियुक्ति प्रक्रिया पर सवालों की झड़ी लगा दी।यह आरोप उन्होंने पीबीएम अस्पताल परिसर में भामाशाह परिवार द्वारा निर्मित कॉटेज के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक मंच से लगाए, जिससे अस्पताल प्रशासन में हडक़ंप मच गया।
संविदा नौकरी के लिए एक लाख की डील!
विधायक व्यास ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि पीबीएम अस्पताल में ठेके पर कर्मचारी लगाने के नाम पर एक-एक लाख रुपये तक की वसूली की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि नौकरी दिलाने के लिए लोगों से खुलेआम रकम मांगी जा रही है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का बड़ा प्रमाण है।
जनता क्लिनिक कर्मचारियों से हर महीने वसूली का आरोप
व्यास ने आरोप लगाया कि पीबीएम के तहत चल रहे जनता क्लिनिक में नियुक्त कर्मचारियों से हर महीने 500 रुपये से लेकर 1000 और 3000 रुपये तक नियमित रूप से वसूले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह वसूली महीनों से चल रही है और कर्मचारियों को मजबूर किया जा रहा है।
500 नियुक्तियों का दावा, लेकिन लगाए सिर्फ 200!
विधायक ने संविदा कर्मचारियों की भर्ती करने वाली निजी फर्मों पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पीबीएम में 500 कर्मचारियों की नियुक्ति बताकर केवल 200-200 लोगों को ही लगाया गया, जबकि शेष लोगों को नहीं लगाकर भ्रष्टाचार का खेल खेला गया।उन्होंने इसे भर्ती प्रक्रिया में बड़ा घोटाला बताते हुए कहा कि जनता के पैसों और अस्पताल की व्यवस्था के साथ खुला खेल किया जा रहा है।
प्राचार्य चुप, अधीक्षक बोले- जांच करवाएंगे। इस कार्यक्रम में मौजूद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घिया ने जरूर बयान देते हुए कहा कि विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करवाई जाएगी।विधायक व्यास के आरोपों के बाद पीबीएम अस्पताल में चल रही संविदा नियुक्ति व्यवस्था और जनता क्लिनिक की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभाता है या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होती है।























