बीकानेर। न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपक कुमार शर्मा ने चेक बाउंस से जुड़े एक अहम मामले में आरोपित अनिल कुमार को बरी कर दिया। जिसमें परिवादी महावीर ने 3.80 लाख रुपये के चेक अनादर का आरोप लगाया था।
परिवादी के अनुसार, अनिल कुमार ने कथित रूप से विधिक देनदारी चुकाने के लिए चेक दिया था, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर बाउंस हो गया। नोटिस देने के बावजूद भुगतान नहीं करने पर मामला कोर्ट में पहुंचा।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता रविन्द्र नाथ और सुनील कुमार चावला ने प्रभावी पैरवी करते हुए परिवादी के कई सबूत उजागर किए। उन्होंने तर्क दिया कि परिवादी यह साबित करने में असफल रहा कि वास्तव में कोई वैध देनदारी मौजूद थी।
कोर्ट ने कहा कि केवल चेक का बाउंस होना अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। जब तक यह सिद्ध न हो कि चेक किसी वैध देनदारी के भुगतान के लिए जारी किया गया था, तब तक आरोपित को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने अनिल कुमार को बरी कर दिया।
चेक बाउंस के मामले में सबूतों के अभाव में आरोपी को किया बरी
बीकानेर। न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपक कुमार शर्मा ने चेक बाउंस से जुड़े एक अहम मामले में आरोपित अनिल कुमार को बरी कर दिया। जिसमें परिवादी महावीर ने 3.80 लाख रुपये के चेक अनादर का आरोप लगाया था।
परिवादी के अनुसार, अनिल कुमार ने कथित रूप से विधिक देनदारी चुकाने के लिए चेक दिया था, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर बाउंस हो गया। नोटिस देने के बावजूद भुगतान नहीं करने पर मामला कोर्ट में पहुंचा।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता रविन्द्र नाथ और सुनील कुमार चावला ने प्रभावी पैरवी करते हुए परिवादी के कई सबूत उजागर किए। उन्होंने तर्क दिया कि परिवादी यह साबित करने में असफल रहा कि वास्तव में कोई वैध देनदारी मौजूद थी।
कोर्ट ने कहा कि केवल चेक का बाउंस होना अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। जब तक यह सिद्ध न हो कि चेक किसी वैध देनदारी के भुगतान के लिए जारी किया गया था, तब तक आरोपित को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने अनिल कुमार को बरी कर दिया।

























