8 करोड़ राजस्थानियों की वाणी को अब मिलेगा मान-सम्मान, आज सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार अब राजस्थान के प्रत्येक विद्यालय में राजस्थानी भाषा पढानी होगी अनिवार्य।
विदित है कि पिछले काफी वर्षों से राजस्थान की 8 करोड़ लोगों के जबान पर भाषा रूपी ताला था वो अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से खुलने जा रहा हैं, सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम निर्णय में राजस्थान सरकार को आदेश दिया है कि नई शिक्षा नीति में जिस तरह से प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा को लागू करने का प्रावधान हैं उस पर चरण बध तरीके से कार्य किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने पदम् मेहता, कल्याण सिंह शेखावत की याचिका पर यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया।
पिछले 30 वर्षों से राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्षरत राजस्थानी मोट्यार परिषद के डॉ गौरीशंकर प्रजापत, डॉ नमामीशंकर आचार्य तथा डॉ हरिराम बिश्नोई ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय शिक्षा के क्षेत्र में अहम कड़ी साबित होगा, अब प्रत्येक विद्यालय में राजस्थानी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य होगी, अब प्रत्येक बच्चा अपनी भाषा को पढ़कर उसके महत्व को समझ सकेगा, लाखो रोजगार उत्पन्न होंगे तथा राजस्थानी संस्क्रति से जुड़ाव होगा।
इसके साथ ही अब राजस्थान सरकार पर राजस्थानी भाषा को राजभाषा बनाने तथा केंद्र सरकार को मान्यता देने की दिशा में असर पड़ेगा।
राजस्थानी मोट्यार परिसद के हिमांशु टाक,राजेश चौधरी,रामावतार उपाध्याय,प्रशांत जैन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय प्रत्येक राजस्थानी के लिए गर्व की अनुभूति करवाने वाला निर्णय हैं अब राजस्थान में रीट परीक्षा में भी राजस्थानी भाषा को जोड़ा जाएगा जिससे राजस्थान प्रदेश के बेरोजगारों को अधिकतम रोजगार मिलेगा।
परिसद के सुनील सांखला, सरजीत सिंह,मुकेश रामावत,मनोज फौजी ने बताया कि भारत के अन्य प्रदेशों की भांति अब राजस्थान प्रदेश में भी राजस्थानी भाषा अनिवार्य होगी तथा राजस्थानी अब अपनी मातृभाषा में अध्ययन कर पायेगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए राजस्थानी मोट्यार परिसद के सदस्यों ने आज कोटगेट पर जश्न मनाया तथा इस निर्णय से होने वाले फायदों को आमजन को समझाया।
इस खुशी में कैलाश जनागल नखतू चंद बजरंग बिश्नोई दिलीप सेन राजेश कड़वासरा बजरंग सहारण सुनील बिश्नोई भवानी सिंह राजू नाथ विनोद सारस्वत अर्जुन पारीक रविंद्र जाजड़ा महादेव शर्मा पंकज पारीक प्रह्लाद जोशी शामिल रहे।





















