केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और हवाई जहाज के ईंधन (एटीएफ) पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती करने का फैसला किया है। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें 1 जून से लागू होगी । हालांकि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
सरकारी घोषणा के अनुसार पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 1.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है। वहीं डीजल के निर्यात पर 13.5 रुपये प्रति लीटर तथा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर 9.5 रुपये प्रति लीटर ड्यूटी तय की गई है।
हर 15 दिन में होती है समीक्षा
सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों को ध्यान में रखते हुए एक्सपोर्ट ड्यूटी की समय-समय पर समीक्षा करती है। आमतौर पर हर 15 दिन में समीक्षा के आधार पर इन दरों में बदलाव किया जाता है, ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता और कीमतों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
हाल ही में बढ़े थे पेट्रोल-डीजल के दाम
इससे पहले 25 मई को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था। इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गई थी।
मार्च में घटाई गई थी एक्साइज ड्यूटी
सरकार ने इससे पहले 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। उस समय पेट्रोल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई थी, जबकि डीजल पर यह पूरी तरह समाप्त कर दी गई थी।
इस फैसले के बाद पेट्रोल पर कुल केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) 21.90 रुपये से घटकर 11.90 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 17.80 रुपये से घटकर 7.80 रुपये प्रति लीटर रह गया था। सरकार का उद्देश्य उस समय ईंधन की खुदरा कीमतों को स्थिर बनाए रखना था।
क्या होती है एक्सपोर्ट ड्यूटी और एटीएफ?
एक्सपोर्ट ड्यूटी वह कर है जो किसी उत्पाद के विदेशों में निर्यात किए जाने पर लगाया जाता है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और कीमतों को नियंत्रित रखना होता है।
एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाला विशेष ईंधन है। यह केरोसिन आधारित ईंधन होता है, जिसका उपयोग विमानों के टर्बाइन इंजनों को चलाने के लिए किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सपोर्ट ड्यूटी में यह बदलाव तेल कंपनियों के निर्यात और घरेलू बाजार के बीच संतुलन बनाने में मदद करेगा।





















