बीकानेर। शहर की जीवनदायिनी ओरण गोचर भूमि, जहाँ हजारों की संख्या में हिरण, गाय, मोर और अनगिनत पक्षी शांति से विचरण करते हैं, आज एक खतरनाक शौक की बलि चढ़ रहे हैं। यहां आए दिन पतंगबाजी का शौक पूरा करने वाले लोग खुले मैदान में डेरा डालते हैं और मांझे की धार से निर्दोष जीव तड़प-तड़प कर मौत के मुंह में समा जाते हैं।
कल 12 सितंबर को सुजानदेसर काली माता मंदिर के पीछे गोचर भूमि में ऐसी ही तस्वीर सामने आई, जब गौ सेवक पवन भाटी और मुरली गहलोत ने देखा कि करीब डेढ़ से दो सौ लोग पतंगबाजी कर रहे थे। हैरानी की बात यह रही कि इनमें से कुछ लोग दिल्ली से सिर्फ पतंगबाजी करने बीकानेर आए थे। उनके पीछे छूटा घातक मांझा यहां घूमने वाले पशु-पक्षियों के लिए मौत का जाल बन रहा है। आए दिन गोचर भूमि में गायें, हिरण और मोर मांझे की धार से घायल होकर दम तोड़ देते हैं। तेज धारदार मांझे से उनकी गर्दन और पांव कट जाते हैं और वे असहाय होकर तड़पते हुए मौत का शिकार हो जाते हैं।
पूर्व पार्षद नंदकिशोर गहलोत, मानव कच्छावा अन्य गांव वासी मौजूद रहे
गौ सेवकों ने पतंगबाजों को समझाने का प्रयास किया कि इस शौक की आड़ में निर्दोष प्राणियों की हत्या हो रही है। लेकिन यह समस्या केवल समझाने से हल नहीं होगी। यह अब प्रशासन के संज्ञान में जाना जरूरी है।
प्रशासन को चाहिए कि तुरंत सख्त कार्रवाई करे और गोचर भूमि में पतंगबाजी पर पूरी तरह रोक लगाए। यह भूमि पशु-पक्षियों के जीवन का आधार है, यहां पतंगबाजी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बीकानेर की धरोहर ओरण भूमि जीव-जंतुओं की कब्रगाह बन जाएगी।
अब सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा और मासूम प्राणियों की इस हत्या पर अंकुश लगाएगा?

























