भानीपुरा गांव की रोही में सोलर प्लांट के लिए एक ही रात में खेजड़ी के 428 पेड़ काट दिए गए। इस घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों ने सोलर कंपनी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। बताया गया है कि बीती रात कुछ अज्ञात लोग गाड़ियों में सवार होकर आए और खेतों में लगे हरे-भरे खेजड़ी के पेड़ों को काट डाला। सुबह जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो दूर-दूर तक पेड़ों के कटे हुए तने और शाखाएं बिखरी पड़ी थीं।
गांव के लोगों का कहना है कि यह जमीन किसानों द्वारा अमृतसर की एक सोलर कंपनी को लीज पर दी गई है। खेत गांव से दूर होने के कारण किसान खुद वहां नहीं जाते, जिसका फायदा उठाकर रात को यह सब कर दिया गया। पेड़ों के कटने से सबसे बड़ा नुकसान वहां बसे पक्षियों और छोटे जीवों को हुआ है। उनके घोंसले उजड़ गए, अंडे टूट गए और कई पक्षियों की मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही जीव रक्षा संस्था के अध्यक्ष मोखराम धारणिया, किसान नेता जेठाराम लाखूसर, ओमसिंह, मोहननाथ, श्रीराम मंडा सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि अब खेतों में फसल नहीं, सोलर पैनल नजर आते हैं। सोलर कंपनियों के कारण वन माफिया पनप गए हैं जो पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सोलर कंपनी के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया, जहां अधिकारी मौके से निकल गए और केवल कर्मचारी मौजूद रहे। कुछ देर में पूगल थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की कि खेजड़ी के पेड़ काटने वालों पर वन्य जीव अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।
इस दौरान भानीपुरा ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि शेर सिंह फौजी, बलवीर सिंह भाटी, अनूप सिंह बीका, श्रवण सिंह भाटी, भंवर सिंह, ओम सिंह, श्रीराम बिश्नोई, पूर्व वन्य जीव प्रतिपालक प्रभुराम साहू सहित कई लोग उपस्थित रहे।
इस मामले में बीकानेर कलेक्टर नम्रता वृष्णी ने बताया कि खेजड़ी के पेड़ काटने की सूचना मिलने पर तहसीलदार और पटवारी को मौके पर भेजा गया है। हालांकि खेजड़ी के लिए अलग से कोई सख्त कानूनी धारा नहीं है, केवल ₹100 जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई करेगा। पूगल एसडीएम राजेंद्र कुमार भिंचड़ ने बताया कि खातेदारों के खिलाफ टिनेंसी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना सिर्फ पर्यावरण हानि नहीं है, बल्कि बीकानेर की पारंपरिक हरियाली, पशु-पक्षियों और भविष्य की पीढ़ियों के जीवन से खिलवाड़ है। यदि अब भी हम नहीं चेते तो आने वाले वर्षों में सोलर पैनल के बीच न तो पेड़ रहेंगे, न पक्षी और न ही जीवन का संतुलन।
























