होलिका दहन को लेकर सम्पूर्ण भारत में फैले भ्रम को लेकर बीकानेर के पञ्चाङ्गकर्त्ता , ज्योतिषाचार्य एवं गणमान्य विद्वानों द्वारा इस विषय पर प्रेस वार्ता का आयोजन रखा गया जिसमे सभी विद्वानों द्वारा शास्त्र सम्मत निर्णय प्रस्तुत किया गया जिसमें वसुदेव कृष्ण धर्मसागर पञ्चाङ्गकर्त्ता , ज्योतिषाचार्य पं. अशोक कुमार ओझा ने बताया कि भद्रा में होलिका दहन करना पूर्ण रूप से मना है अतः इस वर्ष माला घोलाई 2 मार्च को सायं 4:23 तक करना चाहिए एवं होलिका दहन रात्रि शेष अर्थात 3 मार्च को प्रातः 4:6 के बाद प्रातः 6:38 बजे तक करना ही शास्त्र सम्मत है। तथा 3 मार्च को चन्द्र ग्रहण दोपहर 3:28 से प्रारम्भ होगा। परन्तु बीकानेर में यह ग्रहण सायं 6:38 से चन्द्रोदय के साथ दर्शय होगा जिसकी समाप्ति सायं 6:50 पर होगी अर्थात बीकानेर में यह ग्रहण मात्र 12 मिनट ही दृश्य होगा। जिसका सूतक काल 3 मार्च को प्रातः 6:38 से मान्य होगा एवं धुलण्डी उत्सव भी 3 मार्च को ही मानी जायेगी।
ज्योतिषाचार्य पं. गिरिजाशंकर ओझा ने बताया कि सूतक काल में भोजनादि स्पर्श का निषेध है परन्तु बाल , रोगी , गर्भवती महिलाओ एवं वृद्ध जनों के लिए इनका दोष नहीं लगता।ज्योतिषाचार्य पं. कालीचरण जी एवं ज्योतिषाचार्य पं. विनोद जी ओझा ने बताया कि भारत के अन्य पंचांगों में भी भद्रा के समाप्ति के बाद का निर्णय ही दिया हुवा है एवं इस वर्ष तो भद्रा समाप्ति के बाद भी 2 घण्टे से भी ज्यादा का समय प्राप्त हो रहा है अतः भ्रम की कोई स्थिति नहीं है। शास्त्री योगेश ने बताया कि सूतक से पूर्व कन्याओ द्वारा गणगौर पूजन किया जा सकता है। इस प्रेस वार्ता में ज्योतिषाचार्य पं. आशीष जी भादाणी , पं. वीरेंद्र , पं. कृष्णकांत , पं. सोमदत्त आचार्य , पं. भवरलाल बोहरा , पं. राकेश देराश्री , पं. गोपाल भादाणी , पं. विराट सागर , पं. प्रदीप , पं. शिवशंकर , पं. श्री किशन , पं. मोहन , पं. राघवेंद्र , पं. यज्ञेश , पं. योगेश , पं. केदार , पं. करण , पं. अर्जुन , पं. पंकज आदि विद्वानों ने इस निर्णयों में सम्मति प्रदान कर जनता को भद्रा समाप्ति के बाद ही होलिका दहन करना श्रेष्ठ बताया।






















