बीकानेर। राज्य में होने वाले निकाय चुनाव को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। सरकार को मई महीने में ही जिलों से परिसीमन रिपोर्ट प्राप्त हो गई थी, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी इस रिपोर्ट पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। सूत्रों के अनुसार सरकार ने रिपोर्ट को दबाकर रखा हुआ है, जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है कि निकाय चुनाव में देरी नहीं होनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि आज ही चुनाव की घोषणा हो जाए, तो भी तैयारी पूरी करने में कम से कम छह महीने का समय लगेगा। दरअसल, परिसीमन रिपोर्ट के आधार पर वार्डों का गठन, आरक्षण और सीटों का बंटवारा तय किया जाना है। इसके बाद मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाएगा और सभी नए-पुराने वोटर्स को जोड़ा जाएगा। यह लंबी प्रक्रिया चुनावी कार्यक्रम को और आगे बढ़ा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट को लंबित रखने से राज्यभर के निकायों में प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर विकास कार्य अटक गए हैं और जनता को असुविधा झेलनी पड़ रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार राजनीतिक लाभ-हानि का हिसाब लगाकर चुनाव टाल रही है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार परिसीमन रिपोर्ट को कब मंजूरी देती है। यदि फैसला जल्द नहीं हुआ, तो निकाय चुनाव और लंबी अवधि के लिए टल सकते हैं और राजनीतिक असमंजस बरकरार रह सकता है।

























