बीकानेर के सादुलगंज क्षेत्र में उस वक्त हंगामे की स्थिति बन गई, जब आयुष्मान हार्ट हॉस्पिटल के बाहर इलाज में लापरवाही के आरोप को लेकर धरना दे रहे कांग्रेस के युवा नेता रामनिवास कूकणा, कृष्ण गोदारा और पीड़ित परिजनों को पुलिस ने जबरन हटाकर हिरासत में ले लिया। जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले इसी अस्पताल में एक मरीज की उपचार के दौरान मौत हो गई थी, जिस पर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए स्थानीय थाने में परिवाद दर्ज कराया था। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इलाज के दौरान समय पर उचित चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई, जिससे मरीज की जान चली गई। इस घटना के विरोध में कांग्रेस नेता व परिजन अस्पताल के बाहर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे। इसी दौरान मौके पर पहुंची पुलिस ने धरनास्थल खाली करवाने का प्रयास किया, लेकिन धरनार्थियों ने विरोध जताया और कहा कि वे संविधान के तहत अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच बहस हुई और बिना चेतावनी के बल प्रयोग करते हुए धरनार्थियों को हिरासत में ले लिया गया। इस कार्रवाई के बाद घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे आमजन में भारी रोष है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब किसी निजी अस्पताल की लापरवाही से एक व्यक्ति की जान जाती है, तो उस पर कार्रवाई करने की बजाय प्रदर्शन कर रहे लोगों को क्यों दबाया जा रहा है? नागरिकों का मानना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना मौलिक अधिकार है, और ऐसे मामलों में प्रशासन को धरने को दबाने की बजाय लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और आमजन का सिस्टम पर भरोसा बना रहे।

























