
बीकानेर शहर की सड़कों पर इन दिनों एक गंभीर समस्या तेजी से उभर रही है, और वह है निजी अस्पतालों की अवैध पार्किंग व्यवस्था। शहर के मुख्य मार्गों, जैसे अंबेडकर सर्किल से कलेक्टर ऑफिस तक की सड़क हो या मेडिकल कॉलेज चौराहा — यहां निजी अस्पतालों ने न सिर्फ यातायात नियमों की अनदेखी की है, बल्कि बिल्डिंग कोड और नगर निगम के निर्माण नियमों का भी खुला उल्लंघन किया है।
🚧 सड़क बनी अस्पतालों की पार्किंग, जनता हो रही परेशान
मारवाड़ हॉस्पिटल और बीकानेर हार्ट हॉस्पिटल जैसे बड़े अस्पतालों के सामने सड़क पर ही गाड़ियां खड़ी करने की व्यवस्था बना दी गई है। नतीजतन, आए दिन जाम, दुर्घटनाएं और पैदल चलने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों के साथ आने वाले लोगों को अस्पताल के गार्ड तक यह कहते हैं कि “बाइक सड़क पर पार्क करो”, जिससे वाहन चोरी और ट्रैफिक बाधा जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं।
⚖️ कानून क्या कहता है?
अस्पताल संचालन से जुड़ा स्थानीय भवन विनियम (Building Bylaws), नगर विकास प्राधिकरण के दिशा-निर्देश, और नगर निगम की अनुमतियाँ इसके लिए जिम्मेदार हैं।
किसी भी निजी अस्पताल को निर्माण की अनुमति तभी दी जाती है जब वह पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था अपने परिसर में दिखाता है।
यदि ऐसा नहीं है, तो यह सीधा नियमों का उल्लंघन है, जो अस्पताल के लाइसेंस और संचालन की वैधता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
🏛️ प्रशासन की चुप्पी क्यों?
पूर्व संभागीय आयुक्त श्री नीरज के. पवन के कार्यकाल में इस मुद्दे पर कार्रवाई हुई थी। उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर मारवाड़ हॉस्पिटल को निजी पार्किंग व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद अस्पताल ने अस्थायी रूप से पास की जमीन पर पार्किंग बनवाई भी थी। लेकिन अब वही लापरवाही फिर लौट आई है, और न तो नगर निगम, न ही CMHO (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) की ओर से कोई ठोस कार्यवाही देखने को मिल रही है।
🚨 सवालों के घेरे में बीकानेर के सभी निजी अस्पताल
- क्या बीकानेर के निजी अस्पतालों ने अपनी बिल्डिंग प्लान में पार्किंग दर्शाई थी?
- यदि हां, तो वह आज कहां है?
- क्या बिना पार्किंग व्यवस्था के संचालन करने वाले अस्पतालों का लाइसेंस वैध है?
- और यदि ये नियमों के खिलाफ हैं, तो प्रशासन कब तक मौन रहेगा?
🗣️ “हमारा बीकानेर न्यूज़” उठाएगा हर अस्पताल की हकीकत
“हमारा बीकानेर न्यूज़” अब बीकानेर के प्रत्येक निजी अस्पताल की जांच करेगा —
क्या वहां पार्किंग व्यवस्था है?
क्या मरीजों को शुद्ध पानी, शौचालय, प्रतीक्षा कक्ष जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं?
क्या नियमों के विरुद्ध चल रहे अस्पतालों पर प्रशासन की कोई निगरानी है?
हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि जब जनता अपनी गाढ़ी कमाई इन अस्पतालों पर खर्च करती है, तो उन्हें सुविधाएं और सुरक्षा मिलना उनका अधिकार है।
अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी और अस्पताल प्रशासन जागें, वरना जनता सवाल पूछेगी — और जवाबदेही तय की जाएगी।
📢 यदि आपके पास भी कोई अस्पताल से जुड़ी ऐसी जानकारी है, तो हमें भेजें — हम आपकी आवाज़ बनेंगे- 9672313100 Whatsapp पर..

























