बीकानेर में बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए मंत्री सुमित गोदारा ने शहर के बाजारों को रात 11 बजे बंद करने के सख्त निर्देश दिए थे। इसके साथ ही उन्होंने जिला पुलिस अधीक्षक को भी आदेश दिए कि अपने थानाधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित करें कि रात 11 बजे के बाद कोई भी दुकान खुली न रहे।
लेकिन राज्य की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर उठाए गए इस कदम को धरातल पर उतारने में अब तक कोई ठोस कदम नहीं दिखा। कोतवाली और नयाशहर थाना क्षेत्र में आज भी अधिकांश बाजार रात तीन बजे तक खुले रहते हैं। पुलिस गश्त के वाहन जरूर दिखाई देते हैं, लेकिन दुकानदारों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
इससे साफ संकेत मिलता है कि दुकानदारों को या तो किसी राजनीतिक संरक्षण का भरोसा है या प्रशासनिक लापरवाही के कारण मंत्री के आदेशों की अवहेलना हो रही है।
शहरवासियों ने मंत्री के आदेश को स्वागतयोग्य माना था। उनका मानना था कि आदेश के लागू होने से रात के समय बाहरी इलाके से आने वाले नशेड़ी और अपराधी प्रवृत्ति के लोग शहर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। लेकिन दुकानदारों की हठधर्मिता और कानून की अवहेलना ने जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
बीकानेर के पुलिस अधीक्षक ने सभी थानाधिकारियों को अपने क्षेत्रों में रात 11 बजे के बाद दुकानों को बंद करने के आदेश दिए हैं। बावजूद इसके, नयाशहर और कोतवाली के थाने तक यह आदेश पहुँचने में विफल रहे हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि गश्त टीमों द्वारा किसी भी दुकान को बंद कराने का प्रयास नहीं किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि या तो पुलिस प्रशासन में राजनीतिक दबाव है, या फिर थानों में निर्देशों के पालन में गंभीर लापरवाही है। ऐसे में शहर में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जाहिर है, यदि भविष्य में अपराधों को रोकने और शहरवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, तो केवल आदेश देना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका सही ढंग से पालन कराना भी उतना ही जरूरी है।






















