राजसेस महाविद्यालयों में संविदा नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया पर तत्काल रोक एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पुनर्संरचना हेतु डॉ॰ राजेन्द्र सिंह राठौड़, पूर्व चिकित्सा मंत्रीको ज्ञापन सौंपा गया
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (उच्च शिक्षा) राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक अत्यंत गंभीर, नीतिगत एवं दूरगामी प्रभाव वाले विषय पर यह ज्ञापन आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है।
महासंघ का यह सुविचारित मत है कि Raj-CES (राजसेस) योजना के अंतर्गत स्थापित महाविद्यालयों का वर्तमान स्वरूप, संरचना एवं संचालन पद्धति राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रावधानों के विपरीत होने के साथ-साथ राज्य की उच्च शिक्षा को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में अपेक्षित दिशा के उलट पीछे ले जाने वाले सिद्ध हो रहे हैं। इन महाविद्यालयों में स्थायी अकादमिक ढांचे का अभाव, पर्याप्त अधोसंरचना एवं संसाधनों की कमी, शोध एवं नवाचार की संभावनाओं का न होना, विषयगत विस्तार के नाम पर संस्थागत विखंडन, संविदा/अस्थायी नियुक्तियों पर आधारित अध्यापन व्यवस्था, तथा दीर्घकालिक एवं समेकित योजना के बिना नए महाविद्यालयों/विषयों की निरंतर घोषणाएँ—ये सभी ऐसे गंभीर चिंता के बिंदु हैं, जो राज्य की उच्च शिक्षा को गुणवत्ता, बहुविषयकता, अकादमिक निरंतरता एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा से दूर ले जाते हैं, जो किसी भी दृष्टि से राज्य की उच्च शिक्षा के दीर्घकालिक हित में नहीं है।
इन समस्त विषयों को महासंघ द्वारा समय-समय पर विभिन्न पत्रों, ज्ञापनों, प्रतिवेदनों, मीडिया संवाद, व्यक्तिगत वार्ताओं एवं संगठनीय अधिवेशनों के माध्यम से राज्य सरकार के संज्ञान में स्पष्ट रूप से लाया जाता रहा है।
पूर्ववर्ती राज्य सरकार द्वारा सत्र 2020–21 से 2022–23 के मध्य Raj-CES योजना के अंतर्गत 303 नवीन महाविद्यालयों एवं अनेक नवीन विषयों की घोषणा की गई। महासंघ द्वारा प्रारंभ से ही इस योजना का वैचारिक एवं नीतिगत आधार पर विरोध किया गया, परंतु तत्कालीन कांग्रेस सरकार की हठधर्मिता के कारण न केवल यह योजना वापस नहीं ली गई, बल्कि प्रतिवर्ष बिना किसी ठोस दीर्घकालिक योजना के नए Raj-CES महाविद्यालयों एवं विषयों की घोषणाएँ एक नियमित प्रक्रिया बना दी गईं।
विधानसभा चुनाव–2023 के पश्चात गठित नवीन राज्य सरकार के समक्ष भी महासंघ ने इस विषय को प्रमुखता से रखा। जयपुर में आयोजित प्रदेश अधिवेशन–2024 में आपके द्वारा स्वयं इस समस्या के शीघ्र समाधान की घोषणा की गई तथा Raj-CES महाविद्यालयों/विषयों के संचालन के संबंध में सोडाणी समिति का गठन किया गया। यह अत्यंत खेदजनक है कि समिति द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जाने के पश्चात भी आज दिनांक तक न तो उसकी सिफारिशों को सार्वजनिक किया गया है और न ही उन्हें लागू किया गया है।
अत्यंत खेद का विषय है कि वर्तमान सरकार द्वारा भी पूर्ववर्ती सरकार की भाँति Raj-CES योजना के अंतर्गत नवीन महाविद्यालयों एवं विषयों की घोषणाएँ जारी हैं। सत्र 2023–24 एवं 2024–25 में अब तक 71 अतिरिक्त Raj-CES महाविद्यालय घोषित किए जा चुके हैं, जिससे इनकी कुल संख्या 374 हो चुकी है। इनमें से लगभग 260 Raj-CES महाविद्यालयों में एक भी स्थायी संकाय सदस्य कार्यरत नहीं है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के सफल क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
हाल ही में जारी भर्ती परीक्षा कैलेंडर–2026 के माध्यम से महासंघ के संज्ञान में आया है कि Raj-CES नियम–2023 में परिवर्तन के पश्चात राज्य सरकार द्वारा पाँच वर्षों के लिए Fixed Pay पर संविदा नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। संगठन को यह भी ज्ञात हुआ है कि इस प्रक्रिया हेतु अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से अभ्यर्थना भेज दी गई है, जो अस्थायी, असुरक्षित एवं नीति-विरोधी व्यवस्था को संस्थागत स्वरूप देने का प्रयास है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की भावना के सर्वथा विपरीत है।
माननीय मुख्यमंत्री जी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020, जिसे विकसित भारत के शैक्षिक आधार एवं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी स्वप्न के रूप में प्रस्तुत किया गया है, उसके प्रावधानों से Raj-CES योजना 180 डिग्री विपरीत है। यह योजना पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा लाई गई थी और दुर्भाग्यवश वर्तमान सरकार द्वारा भी जारी है, जो राजस्थान की उच्च शिक्षा को राष्ट्रीय नीति के विपरीत दिशा में ले जाने वाला कदम सिद्ध हो रही है।
महासंघ की प्रमुख माँगें :
1. Raj-CES योजना के अंतर्गत संचालित महाविद्यालयों/विषयों के संबंध में गठित सोडाणी समिति की सिफारिशों को अविलंब लागू किया जाए।
2. राज्य में संचालित सभी 374 Raj-CES महाविद्यालयों को सामान्य राजकीय महाविद्यालयों के रूप में संचालित करने के स्पष्ट एवं तत्काल आदेश जारी किए जाएँ, जिससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अनुरूप बड़े एवं बहुविषयक उच्च शिक्षा संस्थानों का विकास संभव हो सके।
3. भर्ती परीक्षा कैलेंडर–2026 के क्रमांक 41 पर अंकित संविदा टीचिंग एसोसिएट एवं अशैक्षणिक संवर्गों की चयन/नियुक्ति प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए तथा अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को भेजी गई अभ्यर्थना निरस्त की जाए।
माननीय मुख्यमंत्री जी, यदि समय रहते इस चयन प्रक्रिया को नहीं रोका गया और Raj-CES महाविद्यालयों को सामान्य महाविद्यालयों की भाँति संचालित करने के स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए गए, तो महासंघ को विवश होकर लोकतांत्रिक एवं आंदोलनात्मक मार्ग अपनाना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
हमें पूर्ण विश्वास है कि आप माननीय प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत के स्वप्न, राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की मूल भावना तथा राजस्थान की उच्च शिक्षा के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर उच्च शिक्षा के हितधारकों के मध्य फैले आक्रोश का शमन करेंगे।























