बीकानेर।पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर लाल डूडी के निधन के बाद बीकानेर स्थित उनके निवास पर नेताओं का आना-जाना जारी है। आज सबसे ज्यादा चर्चा का विषय तब बना, जब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया बीकानेर पहुंचीं।
एयरपोर्ट पर राजे के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ी। यहां बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास, खाजूवाला विधायक विश्वनाथ मेघवाल, विधायक भैराराम सियोल और पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी, श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत, पूर्व विधायक बिहारी बिश्नोई, देहात जिलाध्यक्ष श्याम पंचारिया, शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड़ खुद मौजूद रहे। यह दृश्य अपने आप में कई राजनीतिक संकेत छोड़ गया।
राजे के स्वागत में लगे जोरदार नारों और समर्थकों की भीड़ ने साफ कर दिया कि उनका जनाधार और करिश्मा आज भी बरकरार है, भले ही पार्टी नेतृत्व उन्हें किनारे करने की कोशिश कर रहा हो। विशेष रूप से देवी सिंह भाटी की मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। कभी पार्टी नीतियों से असहमति जताकर धरनों तक बैठने वाले और दो बार भाजपा छोड़ चुके भाटी, आज राजे के स्वागत में सबसे आगे खड़े दिखे। यह इस ओर इशारा करता है कि भाजपा के पुराने नेताओं के दिलों में राजे की पकड़ अब भी मजबूत है।एयरपोर्ट पर राजे और भाटी के बीच गोचर भूमि आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा ने भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। इसे इस रूप में देखा जा रहा है कि स्थानीय विधायक और नेता अपनी ही सरकार की नीतियों से असंतुष्ट हैं और राजे की सक्रियता को एक विकल्प मान रहे हैं।
राजे का यह दौरा न केवल श्रद्धांजलि तक सीमित रहा, बल्कि इसने राजस्थान की सियासत में नई हलचल भी पैदा कर दी। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि वसुंधरा राजे की यह पुनः सक्रियता आने वाले समय में भाजपा और प्रदेश की राजनीति में कौन से नए समीकरण गढ़ती है।

























