बीकानेर शहर के जस्सुसर गेट क्षेत्र के निवासी श्यामसुन्दर मोहता द्वारा 24 साल पुराने कथित फर्जी लोन प्रकरण में अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया गया। परिवाद पर एसीजेएम नं. 2 बीकानेर के आदेश से सदर थाना पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
परिवाद के अनुसार, श्यामसुन्दर मोहता ने बताया कि उन्होंने अक्टूबर व नवंबर 2024 में पंजाब नेशनल बैंक से अपने गोल्ड लोन की सीमा बढ़वाने के लिए संपर्क किया था। इस दौरान बैंक कर्मियों ने उनकी सिबिल रिपोर्ट खराब होने की जानकारी दी। पूछताछ के बाद पता चला कि वर्ष 2001 में बैंक ऑफ पंजाब (जो अब एचडीएफसी बैंक में विलय हो चुका है) से उनके नाम पर वाहन लोन लिया गया, जबकि परिवादी का इससे कोई लेना-देना नहीं था।
परिवादी के अनुसार, किसी अज्ञात व्यक्ति ने बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से उनके नाम पर फर्जी कागज तैयार कर वाहन लोन लिया, जिसकी किस्तें 2001 से 2006 के बीच चार बार जमा भी करवाई भी गईं। शिकायतकर्ता ने कहा कि उन्होंने
न तो कभी लोन लिया और न ही किसी वाहन की खरीद, रजिस्ट्रेशन या बीमा प्रक्रिया में उनका कोई संबंध रहा है।
परिवादी ने बताया कि उन्होंने मामले की जानकारी मिलने पर एचडीएफसी बैंक को ई-मेल व पत्राचार के माध्यम से कई बार रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया, परंतु बैंक ने कोई दस्तावेज मुहैया नहीं करवाए। परिवादी को यह भी आशंका है कि बैंक द्वारा भेजे गए ई-मेल में उनके आधार, वोटर आईडी, पैन कार्ड आदि की प्रतियां मांगी गईं, जिनका दुरुपयोग संभव है।
परिवादी ने चार अप्रैल 2025 को नयाशहर थाना एवं पुलिस अधीक्षक बीकानेर को भी सूचना दी थी, परंतु एफआईआर दर्ज न होने पर उन्हें न्यायालय जाना पड़ा। अदालत के आदेश पर सदर थाना में मामला दर्ज कर जांच एएसआई वेदपाल को सौंपी गई है। पुलिस अब जांच करेगी कि फर्जी लोन किसने और कैसे स्वीकृत करवाया वाहन किस डीलर से खरीदा गया और किसके नाम डिलीवरी हुई? बैंक कर्मचारियों की क्या भूमिका थी? किन दस्तावेजों से पहचान का दुरुपयोग हुआ?
























