बीकानेर। प्रदेशभर में सरकारी नौकरियों में भर्तियों में लाखों की संख्या में अपात्र अभ्यर्थियों के आवेदन करने की जानकारी सामने आई है। इस बात का खुलासा स्वयं राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) ने सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के शासन सचिव को भेजे एक पत्र में किया है।आरपीएससी ने भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही ऐसी गंभीर अनियमितता पर कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि राज्य के कई ई-मित्र कियोस्क संचालक बिना शैक्षणिक योग्यता की जांच किए ही अभ्यर्थियों के ऑनलाइन आवेदन भर रहे हैं, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि दंडनीय अपराध भी है।आरपीएससी सचिव रामनिवास मेहता ने इस संबंध में 23 दिसंबर 2025 को सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के शासन सचिव को पत्र भेजा है। पत्र में बताया गया है कि विभिन्न भर्तियों के दौरान ई-मित्र केंद्रों द्वारा अभ्यर्थियों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी के आधार पर, मूल शैक्षणिक योग्यता देखे बिना आवेदन भरे जा रहे हैं। कई भर्तियों में ऐसे अपात्र अभ्यर्थियों की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है।आयोग ने पत्र में स्पष्ट किया है कि इस तरह की प्रक्रिया अपनाकर न केवल अभ्यर्थी बल्कि ई-मित्र संचालनकर्ता भी भारतीय न्याय संहिता की धारा 217 के अंतर्गत अपराध कर रहे हैं। इससे परीक्षाओं के आयोजन में अनावश्यक श्रम, समय और सरकारी धन का भारी अपव्यय हो रहा है।
आरपीएससी ने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से आग्रह किया है कि सभी ई-मित्र धारकों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि भविष्य में किसी भी भर्ती के ऑनलाइन आवेदन भरते समय यह अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए कि अभ्यर्थी के पास संबंधित पद के लिए निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता मौजूद है।इसके साथ ही आयोग ने राज्य के सभी ई-मित्र केंद्रों आवश्यक प्रशिक्षण दिलवाकर इन निर्देशों की सख्ती पालना सुनिश्चित कराने का भी अनुरोध किया है, त भर्ती प्रक्रियाएं पारदर्शी रहें और संसाधनों का दुरुप रोका जा सके।
























